चार महीने में न्याय
4 महीने की समय-सीमा लागू हो। हर महीने की देरी पर ₹1 करोड़।
भारत में सख़्त कानून पहले से हैं। वे इसलिए नाकाम होते हैं क्योंकि अदालतों, लैब और पुलिस को उनके लिए ज़िम्मेदार नहीं ठहराया जाता। कानून को सच में लागू करवाने के लिए पाँच माँगें। अपना नाम जोड़ें।
कुल हस्ताक्षर
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4 महीने की समय-सीमा लागू हो। हर महीने की देरी पर ₹1 करोड़।
6 घंटे में सबूत, 20 घंटे में DNA रिपोर्ट। लैब के सभी खाली पद भरे जाएँ।
2 घंटे में FIR नहीं? अधिकारी बर्ख़ास्त, निलंबित नहीं।
सबकी पहचान गोपनीय। ख़तरे में हर व्यक्ति को 24 घंटे सुरक्षा।
बलात्कार की एक ही सज़ा: मृत्युदंड।
सभी माँगें नया कानून लागू होने के बाद किए गए अपराधों पर लागू होंगी।
केंद्र सरकार
प्रधानमंत्री · गृह मंत्री · कानून और न्याय मंत्री
संसद
लोकसभा और राज्यसभा की याचिका समितियाँ
हर राज्य और केंद्रशासित प्रदेश
मुख्यमंत्री · गृह विभाग
पुलिस, ज़्यादातर फ़ॉरेंसिक लैब और अस्पताल राज्य सरकारों के अधीन हैं, इसलिए हर राज्य को यह याचिका, उस राज्य के हस्ताक्षरों के साथ, भेजी जाती है।
अभी: 10 साल से आजीवन कारावास + जुर्माना
हमारी माँग: मृत्युदंड
अभी: अपराध नहीं है
हमारी माँग: मृत्युदंड
यह याचिका सिर्फ़ हस्ताक्षरों पर नहीं रुकती। यहाँ बताया गया है कि आपका नाम कहाँ और कब भेजा जाएगा।
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